Part-1: लाठी और साया
केशवपुरी की दुनिया: यह कहानी है केशवपुरी की, जहाँ कान्ति और उसके यार हंसी-मजाक और मस्ती भरे माहौल में जीते हैं। स्कूल से लौटते वक्त बच्चों को एक पेड़ के नीचे पोटली, चप्पल और बाबा छायानंद की एक रहस्यमयी लाठी मिलती है।
परछाई की खोज: मंदिर के बाबा जी बताते हैं कि यह लाठी वहीं रुकती है जहाँ मन नहीं टिक पाता और जिसने इसे छुआ है, उसने अपनी परछाई खोजना शुरू कर दिया है।
Part-2: साये की पहेली
छाया दर्पण का रहस्य: पहाड़ी के पीछे सरोवर और गुप्त गुफा की यात्रा में बच्चों को 'छाया दर्पण' मिलता है।
आंतरिक बदलाव: इस भाग में बच्चे सीखते हैं कि दिल टूटने पर या असफलता मिलने पर चिंता करने के बजाय कोशिश करना जरूरी है। आईने में उन्हें अपने बदले हुए मन और आंतरिक प्रकाश का दर्शन होता है।
Part-3: रमन सर की डायरी
ध्वनि और कंपन (नाद ब्रह्म): स्कूल की पुरानी फिजिक्स लैब और रमन सर की डायरी के माध्यम से बच्चे साउंड एनर्जी और 'ओम' की ध्वनि के गहरे रहस्यों को टटोलते हैं।
अनाहत कंपन: गुरुजी बच्चों को समझाते हैं कि ब्रह्मांड के कण-कण में अनाहत कंपन (बिना टकराव के ऊर्जा) मौजूद है, जो मंत्रों और प्रार्थनाओं के जरिए दिशा पाती है।
Part-4: टॉवर का रहस्य
सत्य की परीक्षा: स्कूल के पीछे बने गुप्त हाईटेक टॉवर तक पहुँचने के लिए बच्चों को 'सत्य' की पहेली को सुलझाना पड़ता है।
रमन सर से भेंट: टॉवर के अंदर उन्हें रमन सर मिलते हैं, जो दीवारों और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy / Aura) को रिकॉर्ड करने के अपने प्रयोग साझा करते हैं।
Part-5: नाद लोक
ध्वनियों का दिव्य लोक: रमन सर के बनाए पोर्टल के जरिए कांति और उसके यार पृथ्वी से लाखों किलोमीटर दूर 'नाद लोक' में प्रवेश करते हैं।
आनंद और एकता: वहाँ वे देखते हैं कि स्वार्थ और अहंकार के कारण नाद टूट चुका है। बच्चे आपसी प्रेम, निस्वार्थ सहयोग और खेल में हार-जीत से ऊपर उठकर फिर से नाद को जोड़ते हैं और ब्रह्मांडीय आनंद को पुनः स्थापित करते हैं।
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